Tata Steel का शेयर इस समय लगभग ₹200–210 के दायरे में ट्रेड हो रहा है, पिछले 52 हफ्तों में इसने लगभग ₹125 के लो और करीब ₹206–207 के हाई को छुआ है, यानी एक साल में लगभग 50% का रिटर्न दिया है। 2020 से 2026 के बीच लम्बे समय के ऐतिहासिक डेटा को देखें तो 2020 के बाद से स्टॉक ने तेज रिकवरी दिखाई है और 2023–2025 के दौरान स्टील साइकिल और कंपनी की डीलिवरेजिंग के साथ उतार–चढ़ाव के बावजूद पॉज़िटिव लॉन्ग‑टर्म ट्रेंड बना हुआ है
Company की Latest Performance और Recent Results
FY 2025–26 के Q3 (Oct–Dec 2025) में Tata Steel ने लगभग ₹26.9 बिलियन (लगभग ₹2,689 करोड़) का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट रिपोर्ट किया, जो पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले करीब 723% की तेज़ बढ़त है, यह मार्जिन सुधार और बेहतर रियलाइज़ेशन को दिखाता है। कंपनी ने पिछले कुछ सालों में सेल्स ग्रोथ में औसतन लगभग 9–10% के आसपास की ग्रोथ दिखाई है, हालांकि पांच साल का औसत रेवेन्यू ग्रोथ बहुत तेज़ नहीं रहा, जिससे पता चलता है कि साइक्लिकल इंडस्ट्री में डिमांड और प्राइसिंग दोनों का असर रहता है। बैलेंस शीट की बात करें तो Tata Steel ने डेब्ट कम करने पर फोकस किया है और बुक वैल्यू के मुकाबले शेयर लगभग 2.7–2.8 गुना प्राइस‑टू‑बुक पर ट्रेड हो रहा है, जो मार्केट की प्रीमियम वैल्यूएशन की अपेक्षा दिखाता है
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Order Book, Capex और Growth Plan
Tata Steel ने भारत में ग्रोथ पर फोकस करते हुए FY 2025–26 के लिए लगभग ₹15,000 करोड़ कैपेक्स का प्लान किया है, जिसमें से लगभग ₹11,000 करोड़ यानी करीब 73% से ज्यादा हिस्सा इंडिया बिज़नेस पर ही लगाया जा रहा है। कंपनी Neelachal Ispat (NINL) में फेज‑1 एक्सपांशन के ज़रिए क्षमता को करीब 3 मिलियन टन से बढ़ाकर लगभग 6 मिलियन टन करने पर काम कर रही है, जिससे लांग प्रोडक्ट्स (rebars, coils, wire rods) की क्षमता पूरे इंडिया पोर्टफोलियो में करीब 5.4 MTPA से बढ़कर 10 MTPA से ऊपर जाने का टारगेट है। यह एक्सपांशन 3–4 साल में धीरे‑धीरे पूरा होगा, जिस दौरान कंपनी के ऑर्डर बुक को इंफ्रास्ट्रक्चर, हाउसिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर की बढ़ती डिमांड सपोर्ट कर सकती है, खासकर भारत में कैपिटल एक्सपेंडिचर साइकिल मजबूत रहने की संभावना है।
Past Share Performance और आने वाले 5–10 साल के Target
पिछले एक साल में Tata Steel ने लगभग 50% का रिटर्न दिया, जबकि 52‑week रेंज ₹125.30 से लगभग ₹206.34 रही है, जो बताती है कि करेक्शन के बाद स्टॉक ने अच्छा रिकवरी फेज देखा है। 1990 से 2026 तक के लॉन्ग‑टर्म डेटा में Tata Steel ने कई बार डीप साइक्लिकल फेज (जैसे 2018–2019 में निगेटिव रिटर्न) दिखाए, लेकिन 2017 जैसे सालों में 90%+ रिटर्न भी दिया है, यानी लॉन्ग‑टर्म में यह हाई‑बीटा, साइक्लिकल मेटल स्टॉक की कैटेगरी में आता है। मौजूदा प्राइस, कैपेक्स प्लान, इंडिया‑फोकस्ड ग्रोथ और स्टील साइकिल को ध्यान में रखते हुए कई रिटेल व एनालिस्ट‑लेवल अनुमान अगले 5–10 साल के लिए कंज़र्वेटिव से मॉडरेट बुलिश रेंज में रखे जा सकते हैं; नीचे दिया गया टेबल एक अनुमानित (hypothetical) रेंज दिखाता है, जो सिर्फ शैक्षिक उद्देश्य के लिए है, किसी ब्रोकरेज की आधिकारिक रिपोर्ट नहीं है
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| Year | Approx. Target Range (₹) |
|---|---|
| 2026 | 230 – 260 |
| 2028 | 280 – 340 |
| 2030 | 340 – 420 |
| 2032 | 400 – 500 |
| 2034 | 450 – 560 |
| 2035 | 500 – 600 |
Main Growth Factors और Risk Point
Tata Steel के लिए सबसे बड़ा growth driver India‑centric strategy है, जहां company का कैपेक्स majorly domestic capacity बढ़ाने पर जा रहा है और सरकार का focus roads, railways, housing और infra पर है, जिससे लांग प्रोडक्ट्स की demand structurally strong दिखती है। NINL expansion से long products capacity लगभग डबल होने की संभावना है, जिससे higher‑margin rebars और wire rods का mix बढ़ सकता है, साथ ही consolidated स्तर पर utilisation बेहतर होने पर operating leverage भी मिल सकता है, जो आने वाले सालों में earnings growth को support कर सकता है। दूसरी तरफ risk factors में global recession का खतरा, steel prices में sharp correction, raw material (iron ore, coking coal) की cost volatility और regulatory/environment norms कड़े होने की संभावना शामिल हैं, जिनसे earnings और valuation दोनों पर दबाव आ सकता है; इसलिए Tata Steel में investment करते समय long‑term horizon और risk tolerance clear होना ज़रूरी है
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश या ट्रेडिंग सलाह नहीं माना जाए।







