Budget 2026 में सरकार ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस पर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT की दर बढ़ा दी है, जिस पर काफी बहस हो रही है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने साफ किया है कि STT सिर्फ डेरिवेटिव सेगमेंट, यानी फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर बढ़ाया गया है, कैश मार्केट पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला गया।
F&O मार्केट GDP से 500 गुना बड़ा
इनकम टैक्स इंडिया द्वारा X पर जारी डेटा के मुताबिक भारत की नाममात्र GDP लगभग ₹300 लाख करोड़ के आसपास मानी गई है। इसके मुकाबले F&O सेगमेंट का सालाना ट्रांजैक्शन वॉल्यूम GDP से 500 गुना से भी ज्यादा बताया गया है, यानी यह आंकड़ा लगभग ₹1.5 लाख करोड़ के स्तर को पार कर चुका है। विभाग का कहना है कि इतना बड़ा और ज्यादातर सट्टा आधारित कारोबार अगर अनकंट्रोल्ड रहे तो वित्तीय स्थिरता पर खतरा बढ़ सकता है
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STT की नई दरें और असर
सरकार ने जानकारी दी कि फ्यूचर्स पर STT की दर 0.05 प्रतिशत और ऑप्शंस पर 0.15 प्रतिशत कर दी गई है। पहले के मुकाबले यह बढ़ोतरी ऐसी है कि हर बड़े कॉन्ट्रैक्ट पर सरकार को कुछ ज्यादा टैक्स मिल जाएगा, जबकि रिटेल ट्रेडर के लिए यह लागत में मामूली लेकिन साफ दिखने वाली बढ़ोतरी है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का कहना है कि इतनी बड़ी वॉल्यूम वाली एक्टिविटी पर थोड़ा ज्यादा टैक्स लगने से सट्टेबाजी पर ब्रेक लगेगा और रेवेन्यू में भी बढ़ोतरी होगी
शेयर बाजार की शुरुआती प्रतिक्रिया
STT बढ़ने के ऐलान के तुरंत बाद शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। बजट वाले दिन सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों इंडेक्स 2 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए, खासकर ब्रोकिंग, फाइनेंशियल्स और डेरिवेटिव ट्रेडिंग से जुड़े स्टॉक्स पर दबाव ज्यादा दिखा। शॉर्ट टर्म में कई ट्रेडर्स ने F&O पोजिशन घटाकर रिस्क कम करने की कोशिश की, जिससे वोलैटिलिटी और बढ़ गई
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश या ट्रेडिंग सलाह नहीं माना जाए।







