IFCI (Industrial Finance Corporation of India) एक पुरानी टर्म-लेंडिंग NBFC है जो इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्रियल और बड़े कैपेक्स प्रोजेक्ट्स को फाइनेंस देती है, जिसमें रोड, एयरपोर्ट, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य प्रोजेक्ट शामिल हैं। जनवरी 2026 में NSE पर IFCI का शेयर प्राइस लगभग 56.1 रुपये के आसपास दिख रहा है, जबकि जनवरी के शुरुआती ट्रेडिंग सेशन में यह 53–57 रुपये के रेंज में मूव करता दिखा, जिससे शॉर्ट-टर्म में हाई वॉल्यूम के साथ वोलैटिलिटी दिखती है। सरकार की शेयरहोल्डिंग 70% से ज्यादा मानी जा रही है, जिसे और मजबूत करने के लिए हाल में कैपिटल इन्फ्यूजन अप्रूव हुआ है, जो लॉन्ग टर्म स्टेबिलिटी के लिए पॉजिटिव सिग्नल है।
लेटेस्ट रिजल्ट्स, NPA और कैपिटल इन्फ्यूजन
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Q2 FY26 में IFCI ने कंसॉलिडेटेड टोटल इनकम करीब 752.21 करोड़ रुपये रिपोर्ट की, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 69% की मजबूत वृद्धि दिखाती है और नेट प्रॉफिट लगभग 317.40 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के 184.89 करोड़ से लगभग 70% से ज्यादा की जंप है। हालांकि प्रॉफिट बढ़ने के बावजूद कंपनी की कैपिटल एडिक्वेसी (CRAR) अभी भी नेगेटिव ज़ोन में लगभग -21.32% है और ग्रॉस NPA रेशियो लगभग 96% तथा नेट NPA लगभग 80% के आसपास रिपोर्ट हुआ, जो बताता है कि बैलेंस शीट अभी भी स्ट्रेस्ड एसेट्स से भरी है और रिकवरी तथा राइट-ऑफ पर काफी काम बाकी है। इसी बैकड्रॉप में सरकार ने FY 2024–25 के लिए लगभग 500 करोड़ रुपये का कैपिटल इन्फ्यूजन अप्रूव किया है, जो प्रेफरेंशियल शेयर के जरिए आएगा और इसका उद्देश्य IFCI की फाइनेंशियल पोज़ीशन सुधारना और रीस्ट्रक्चरिंग को सपोर्ट करना है।
फंडामेंटल्स, ऑर्डर बुक और एक्सपर्ट व्यू
हाल के डेटा से दिखता है कि कंपनी की इनकम और प्रॉफिट में तेज रिकवरी आई है, लेकिन बहुत बड़ा हिस्सा लेगेसी स्ट्रेस्ड लोन पोर्टफोलियो क्लीन‑अप से जुड़ा है, जहाँ NPA 80–96% रेंज में है और CRAR नेगेटिव होने के कारण रेग्युलेटरी नॉर्म्स को पूरा करने के लिए सरकार पर निर्भरता बनी हुई है। सरकार द्वारा 500 करोड़ रुपये का कैपिटल इन्फ्यूजन और शेयर कैपिटल सब्सक्रिप्शन का फैसला यह संकेत देता है कि पॉलिसी लेवल पर IFCI को रिवाइव करने का इरादा है, परंतु हाई NPA और नेगेटिव कैपिटल के चलते कई एनालिस्ट इसे अभी भी हाई‑रिस्क टर्नअराउंड स्टोरी की कैटेगरी में रखते हैं और कंज़र्वेटिव इन्वेस्टर्स के लिए सावधानी की सलाह देते हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन और सरकारी कैपेक्स से फ्यूचर लेंडिंग ऑपर्चुनिटी बढ़ सकती है, लेकिन पुराने लोन्स और रेग्युलेटरी प्रेशर साफ हुए बिना वैल्यूएशन पर स्थायी री‑रेटिंग की संभावना सीमित मानी जाती है, इसलिए किसी भी दीर्घकालिक प्राइस टारगेट को केवल एजुकेशनल एस्टीमेट के रूप में देखना चाहिए, ना कि किसी तरह की सलाह के रूप में।
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IFCI Share Price Target 2026–2035
| Year | न्यूनतम Target (₹) | अधिकतम Target (₹) |
|---|---|---|
| 2026 | 45 | 95 |
| 2027 | 55 | 125 |
| 2028 | 70 | 160 |
| 2029 | 85 | 190 |
| 2030 | 100 | 220 |
| 2031 | 115 | 260 |
| 2032 | 130 | 295 |
| 2033 | 145 | 330 |
| 2034 | 160 | 360 |
| 2035 | 180 | 400 |
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश या ट्रेडिंग सलाह नहीं माना जाए।







