नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने नेशनल कोल ट्रेडिंग एक्सचेंज चलाने के लिए नई यूनिट बनाने को मंजूरी दी है। इस यूनिट में कम से कम 60 फीसदी हिस्सेदारी NSE की होगी और बाकी 40 फीसदी अन्य शेयरहोल्डर्स को दी जाएगी। यह प्लेटफॉर्म देश में उत्पादित कोयले की खरीद–फरोख्त के लिए एक यूनिफाइड इलेक्ट्रॉनिक मार्केट उपलब्ध कराएगा।
कोल ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म कैसे काम करेगा?
यह प्लेटफॉर्म स्टैंडर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स के जरिए फिजिकल कोयले की इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग कराएगा, जिसमें तय क्वॉलिटी, क्वांटिटी और डिलीवरी की शर्तें होंगी। आगे चलकर रेगुलेटरी मंजूरी मिलने पर इसी प्लेटफॉर्म पर कोयला आधारित डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स भी शुरू किए जा सकते हैं। इससे पावर प्रोड्यूसर्स और भारी उद्योगों को कीमतों में उतार–चढ़ाव से बचाव के लिए हेजिंग टूल मिल सकता है
Read more: BSE-NSE की टॉप 5: Adani Green, Waaree Energies में FII ने 3 गुना हिस्सा बढ़ाया; मल्टीबैगर अलर्ट!
भारत के कोयला बाजार की मौजूदा स्थिति
भारत में 2024–25 में कुल कोयला उत्पादन लगभग 1047.5 मिलियन टन रहा, जो 2023–24 के 997.8 मिलियन टन से करीब 4.98 फीसदी ज्यादा है। कोल इंडिया देश में खनन होने वाले 1 अरब टन से ज्यादा कोयले का लगभग तीन–चौथाई हिस्सा अपने नियंत्रण में रखती है, जिससे यह घरेलू बाजार की सबसे बड़ी सप्लायर बनी हुई है। दिसंबर 2025 में अकेले मासिक उत्पादन 101 मिलियन टन के पार पहुंचा, जो मांग और सप्लाई दोनों में मजबूती दिखाता है
BCCL और Coal India पर संभावित असर
NSE का मानना है कि अभी एक यूनिफाइड प्लेटफॉर्म न होने से कीमतों में गड़बड़ी, छोटे पार्टिसिपेंट्स की सीमित पहुंच और भरोसेमंद स्पॉट बेंचमार्क की कमी देखी जाती है। नए एक्सचेंज के आने से कोल इंडिया और इसकी सहायक/सम्बंधित कंपनियों जैसे भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) को पारदर्शी प्राइस डिस्कवरी और बेहतर डिमांड विजिबिलिटी मिल सकती है। 6 फरवरी 2026 को BCCL का शेयर NSE पर करीब 37–37.5 रुपये के आसपास बंद हुआ और इसका मार्केट कैप लगभग 17,400 करोड़ रुपये के स्तर पर रहा
क्या BCCL मल्टीबैगर बन सकता है?
कोयला सेक्टर में मजबूत उत्पादन, बढ़ती बिजली मांग और पारदर्शी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म BCCL जैसे शेयरों के लिए पॉजिटिव फैक्टर बन सकते हैं। पारदर्शी स्पॉट प्राइस और संभावित डेरिवेटिव्स से कंपनियों की प्राइसिंग पावर और प्लानिंग में सुधार आ सकता है, जिसका असर लंबे समय में रेवेन्यू और मुनाफे पर दिख सकता है। हालांकि, निवेश का फैसला लेते समय निवेशक को कंपनी के फाइनेंशियल्स, वैल्यूएशन, सरकारी नीतियां और सेक्टर रिस्क जैसे कारकों का अलग से विश्लेषण करना जरूरी है।
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश या ट्रेडिंग सलाह नहीं माना जाए।







