Power Stock में हाल के वर्षों में कई मिड व स्मॉल कैप कंपनियों ने जबरदस्त रिटर्न दिए हैं, लेकिन साथ ही कई स्टॉक अपनी पीक वैल्यू से 70–90% तक टूटे भी हैं। ऐसी गिरावट के बीच जिन कंपनियों पर बड़े निवेशक दांव बनाए रखते हैं और जो पूरी तरह डेट‑फ्री हैं, वे लंबी दौड़ के घोड़े मानी जाती हैं
आशीष कचोलिया का पावर व एनर्जी थीम पर फोकस
Power Stock आशीष कचोलिया अपने पोर्टफोलियो में कैपिटल‑इंटेंसिव सेक्टर जैसे इंजीनियरिंग, पावर सप्लाई सॉल्यूशंस और एनर्जी ट्रांजिशन से जुड़ी कंपनियों को अहम जगह दे रहे हैं। उनकी होल्डिंग Advait Energy Transitions जैसी कंपनी में भी दिखती है, जो ट्रांसमिशन और सबस्टेशन सॉल्यूशंस देती है और पिछले 5 साल में 6900% से ज्यादा रिटर्न दे चुकी है। एनर्जी और पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी ऐसी कंपनियां लंबी अवधि की थीमैटिक ग्रोथ स्टोरी पर खेलती हैं, इसलिए दिग्गज निवेशकों का भरोसा इन्हें अतिरिक्त आकर्षण देता है।
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डेट‑फ्री पावर कंपनी क्यों खास मानी जाती है
कोई भी Power Stock या एनर्जी इंफ्रा कंपनी जब पूरी तरह डेट‑फ्री होती है, तो उस पर ब्याज का बोझ नहीं रहता और कैश फ्लो सीधे विस्तार, नई कैपेसिटी और टेक्नोलॉजी अपग्रेड में लगाया जा सकता है। डेट‑फ्री स्टेटस की वजह से ऐसी कंपनियों का दिवालिया होने का रिस्क अपेक्षाकृत कम माना जाता है और वे मंदी जैसी मुश्किल परिस्थितियों में भी अपने फिक्स्ड कॉस्ट आराम से मैनेज कर लेती हैं। यही कारण है कि निवेशक हाई डेब्ट वाली यूटिलिटी या पावर कंपनियों की तुलना में मजबूत बैलेंस शीट और कम या शून्य कर्ज वाली कंपनियों को ज्यादा प्रीमियम देने के लिए तैयार रहते हैं
तेज ग्रोथ और वैल्यूएशन में भारी गिरावट
Power Stock और एनर्जी ट्रांजिशन थीम से जुड़ी कई कंपनियों ने पिछले कुछ सालों में तेज रेवेन्यू और प्रॉफिट ग्रोथ दिखाई, लेकिन FY25–FY26 में मिड व स्मॉल कैप करेक्शन की वजह से कई स्टॉक्स अपने हाई से 70–90% तक टूटे हैं। ऐसी गिरावट के बावजूद जहां ऑर्डर बुक मजबूत है, ROCE ऊंचा है और Power Stock कंपनी पर कर्ज नहीं है, वहां वैल्यूएशन के लिहाज से निवेशकों की दिलचस्पी बनी रहती है। कई बार ऑर्डर बैकलॉग सैकड़ों करोड़ रुपये का होता है, लेकिन मार्केट करेक्शन के बाद शेयर प्राइस उस क्षमता को पूरी तरह रिफ्लेक्ट नहीं कर रहा होता, जिससे “डीप वैल्यू” का अवसर बनता है
निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
Power Stock या एनर्जी थीम में काम कर रही ऐसी डेट‑फ्री कंपनियों में निवेश से पहले रेवेन्यू CAGR, मार्जिन ट्रेंड, ऑर्डर बुक, रिटर्न रेशियो और प्रोजेक्ट पाइपलाइन जैसे फैक्टर्स को अच्छे से समझना जरूरी है। साथ ही किसी भी दिग्गज निवेशक की हिस्सेदारी को सिर्फ संकेत के रूप में देखना चाहिए, अंतिम फैसला खुद की रिसर्च, रिस्क प्रोफाइल और फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह के आधार पर ही लेना चाहिए।
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश या ट्रेडिंग सलाह नहीं माना जाए।







