Reliance Communications का शेयर 23 जनवरी 2026 को लगभग ₹1.03 पर ट्रेड हो रहा है, जबकि पिछले एक साल में इसने लगभग ₹0.95 से ₹1.95 का रेंज बनाया है। कंपनी का मार्केट कैप सिर्फ लगभग ₹2.8 अरब (₹280 करोड़) के आसपास है, जो बताता है कि मार्केट इसे एक डिस्टर्ड/पैनी स्टॉक की तरह वैल्यू कर रही है। सितंबर 2025 क्वार्टर में कंपनी की रेवेन्यू लगभग ₹87 करोड़ रही, जबकि नेट लॉस करीब ₹2,701 करोड़ तक दर्ज किया गया है, जिससे नेट प्रॉफिट मार्जिन लगभग माइनस 3,100% के आसपास दिखता है। इतनी बुरी प्रॉफिटेबिलिटी के साथ कंपनी का बिज़नेस मॉडल अभी सस्टेनेबल नहीं दिखता और कैश फ्लो पर भी भारी दबाव बना हुआ है।
हालिया नतीजे और फाइनेंशियल परफॉर्मेंस
Q2 FY 2025‑26 (सितंबर 2025) में Reliance Communications की कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में क्वार्टर‑ऑन‑क्वार्टर लगभग 3.3% की मामूली ग्रोथ दर्ज की गई, पर साल-दर‑साल ग्रोथ लगभग जीरो रही है, यानी कंपनी का टॉपलाइन लगभग फ्लैट है। इसके विपरीत, इसी क्वार्टर में खर्चे लगभग 44% QoQ और 44% YoY बढ़ गए, जिससे ऑपरेटिंग लेवल पर लॉस और ज्यादा बढ़ने का रिस्क संकेत मिलता है। Q4 FY25 में ऑपरेशंस से कुल इनकम लगभग ₹101 करोड़ रही, जो Q4 FY24 के ₹104 करोड़ के मुकाबले लगभग 2.9% कम है और ऑपरेटिंग लॉस भी अभी तक पॉज़िटिव में नहीं आया है। कंपनी का Q4 FY25 ऑपरेटिंग लॉस (एक्सेप्शनल आइटम से पहले) लगभग ₹26 करोड़ था, जो कि पिछले साल के ₹30 करोड़ से थोड़ा बेहतर है, लेकिन टैक्स से पहले कुल लॉस लगभग ₹75 करोड़ तक बढ़ गया, जो साल-दर‑साल 150% तक खराब हुआ। ये आंकड़े दिखाते हैं कि कंपनी अभी भी क्लियर टर्नअराउंड फेज़ में नहीं है और बैलेंस शीट पर स्ट्रेस बना हुआ है
इन्सॉल्वेंसी, ऑर्डर बुक
Reliance Communications और इसकी ग्रुप कंपनियां पिछले कुछ सालों से Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) के तहत NCLT/NCLAT प्रोसीडिंग्स में चल रही हैं, जहां क्रेडिटर्स की कमेटी (CoC) और रिज़ोल्यूशन प्लान्स पर लगातार सुनवाई हो रही है। हाल ही में एक केस में NCLAT ने Reliance Communications से जुड़ी इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी के मामले में CoC की पावर पर भी लिमिट लगाते हुए कहा कि एक बार रिज़ोल्यूशन प्लान अप्रूव हो जाने के बाद उसे बदलकर फंड्स की री‑एलोकेशन नहीं की जा सकती। ऐसे लीगल मामलों के चलते कंपनी के लिए लॉन्ग‑टर्म प्रोजेक्ट्स और ऑर्डर बुक को क्लीन तरीके से ग्रो करना मुश्किल बन जाता है, क्योंकि बैंक और वेंडर्स दोनों ही नए बड़े कॉन्ट्रैक्ट देने में सावधानी बरतते हैं।
प्राइस हिस्ट्री और टेक्निकल पैटर्न
पिछले एक साल में RCOM का प्राइस ₹0.95–₹1.95 के टाइट रेंज में घूमता रहा है, जिसमें कई बार लोअर और अपर सर्किट दोनों देखने को मिले हैं। 2024 के आखिरी क्वार्टर में शेयर ने लगभग ₹2.04 तक के लेवल को टच किया, लेकिन दिसंबर 2024 के बाद से वॉल्यूम के साथ धीरे‑धीरे प्राइस डाउनसाइड की तरफ आया और 2025 के मिड में 1–1.8 के रेंज में साइडवेज सेशन दिखा। अगस्त 2025 में डेटा में दिखता है कि कई दिनों पर 3–5% की मूव के साथ हाई इंट्राडे वॉलेटिलिटी रही, जहां शेयर अक्सर इंट्रा‑डे हाई से नीचे क्लोज होता है, जो शॉर्ट‑टर्म ट्रेडर्स की एक्टिविटी की तरफ इशारा करता है। टेक्निकली, इतना लो प्राइस स्टॉक अक्सर माइक्रो रेजिस्टेंस और सपोर्ट पर रिएक्ट करता है, लेकिन लॉन्ग‑टर्म ट्रेंड अभी भी डाउन/साइडवेज है, क्योंकि फंडामेंटल ट्रिगर मौजूद नहीं हैं। ऐसे पेनी स्टॉक्स में चार्ट पैटर्न से ज्यादा न्यूज़‑फ्लो, सर्किट लिमिट्स और सट्टेबाज़ी प्राइस एक्शन को कंट्रोल करते हैं।
अगले 10 साल के संभावित टारगेट
| Year | अनुमानित संभावित प्राइस रेंज (₹) |
|---|---|
| 2026 | 0.80 – 1.80 |
| 2027 | 0.70 – 2.00 |
| 2028 | 0.50 – 2.20 |
| 2029 | 0.50 – 2.50 |
| 2030 | 0.40 – 3.00 |
| 2031 | 0.30 – 3.50 |
| 2032 | 0.20 – 4.00 |
| 2033 | 0.20 – 4.50 |
| 2034 | 0.10 – 5.00 |
| 2035 | 0.10 – 6.00 |
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश या ट्रेडिंग सलाह नहीं माना जाए।







