नुकसान 3 गुना, सेल्स डबल… फिर भी ये Pharma Stock बनेगा मल्टीबैगर?

Pharma Stock: Zota Healthcare Limited केंद्र सरकार ने यूनियन बजट 2026-27 में दवाइयों, रिसर्च और बायोफार्मा से जुड़े उद्योगों के लिए नई योजनाएं और हजारों करोड़ रुपये के निवेश का ऐलान किया है। बायोफार्मा शक्ति जैसी स्कीमों के जरिए रिसर्च सेंटर और क्लीनिकल ट्रायल बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे जेनेरिक दवाइयों की डिमांड और सप्लाई दोनों मजबूत होने की संभावना है।

बिक्री डबल, घाटा तीन गुना के आस-पास

Zota कंपनी की बिक्री पिछले एक साल में लगभग दोगुनी हो गई है, जिसका मतलब है कि प्रोडक्ट की डिमांड और रिटेल नेटवर्क दोनों में तेज विस्तार हुआ है। वहीं दूसरी तरफ, तेजी से स्टोर खोलने, मार्केटिंग और कर्मचारियों पर बढ़ते खर्च की वजह से कंपनी का घाटा भी कई गुना बढ़ गया है और अभी नेट लेवल पर कंपनी लॉस में है, हालांकि ऑपरेटिंग स्तर पर कंपनी मुनाफे में बताई जा रही है

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Davaindia मॉडल और जेनेरिक दवाओं की ताकत

Zota का बड़ा कारोबार Davaindia नाम के जेनेरिक फार्मेसी नेटवर्क से आता है, जहां ब्रांडेड दवाओं के मुकाबले 30 से 90 फीसदी तक सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराई जाती हैं। यह मॉडल मैन्युफैक्चरर, स्टोर और ग्राहक के सीधे कनेक्शन पर आधारित है, जिसमें डिस्ट्रीब्यूटर और पारंपरिक रिटेल चेन को हटाकर लागत घटाई जाती है, और यही कम कीमत वाला मॉडल बड़ी आबादी के लिए आकर्षण बना हुआ है।

क्रॉनिक बीमारियां और लंबी अवधि की आमदनी

भारत में डायबिटीज, हृदय रोग और कैंसर जैसी क्रॉनिक बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनको नियमित और लंबे समय तक दवाइयों की जरूरत रहती है। Zota Healthcare की आमदनी का बड़ा हिस्सा इसी तरह की लंबी अवधि वाली दवा खपत से जुड़ा है, जिससे कंपनी को बार-बार लौटने वाले ग्राहकों का मजबूत बेस बनाने का मौका मिलता है

संस्थागत निवेश और 350 करोड़ रुपये की फंडिंग

तीसरी तिमाही में विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू बड़े निवेशकों ने Zota Healthcare में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। यह बढ़ोतरी कंपनी के क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट के जरिए जुटाए गए लगभग 350 करोड़ रुपये के निवेश से जुड़ी है, जो यह दिखाता है कि संस्थान कंपनी के बिजनेस मॉडल और ग्रोथ स्टोरी पर भरोसा कर रहे हैं

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आगे की राह और मल्टीबैगर की संभावना का डेटा पक्ष

कंपनी तेजी से रिटेल नेटवर्क बढ़ा रही है, जेनेरिक सेगमेंट में प्राइस एडवांटेज रखती है और सरकार की नीतियां भी सेक्टर के पक्ष में हैं, इसलिए रेवेन्यू ग्रोथ की संभावनाएं मजबूत दिखती हैं। दूसरी ओर, बढ़ते घाटे, लगातार कैपेक्स और मार्जिन पर दबाव जैसे फैक्टर जोखिम बने हुए हैं, इसलिए फिलहाल डेटा यह दिखाता है कि स्टॉक में हाई ग्रोथ की क्षमता तो है, लेकिन मुनाफाखोरी का साफ ट्रैक सामने आने में समय लग सकता है

Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश या ट्रेडिंग सलाह नहीं माना जाए।

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